महा उत्सव व दिव्यता की नौ विशेष रातें

संस्कृत में नवरात्रि का शाब्दिक अर्थ होता है नौ रातें, जो सांत्वना और विश्राम दे। रात्रि फिर से उर्जा लाती है। ये हमारे अस्तित्व के तीनों स्तरों-स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर को आराम देती हैं। ये परिवर्तन का समय है अपने स्राेत में वापस जाने का समय। इस समय प्रकृति भी अपने पुराने स्वरूप को छोड़कर कायाकल्प के दौर से गुज़रती है और नए सिरे से प्रकट होती है।

जैसे जन्म से पूर्व बच्चा मां के गर्भ में रहता है, उसी तरह इन नौ दिन और नौ रातों में, एक साधक उपवास, प्रार्थना, मौन और ध्यान के माध्यम से अपने सच्चे स्राेत की तरफ़ लौटता है जो प्रेम, खुशी और शांति है। व्रत या उपवास से शरीर का शुद्धिकरण होता है, मौन से वाणी शुद्ध होती है और विचलित मन को विश्राम मिलता है। ध्यान व्यक्ति को उसकी भीतर की गहराई में ले जाता है।

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर



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Ara News - nine special nights of maha utsav and divinity


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