महा उत्सव व दिव्यता की नौ विशेष रातें
जैसे जन्म से पूर्व बच्चा मां के गर्भ में रहता है, उसी तरह इन नौ दिन और नौ रातों में, एक साधक उपवास, प्रार्थना, मौन और ध्यान के माध्यम से अपने सच्चे स्राेत की तरफ़ लौटता है जो प्रेम, खुशी और शांति है। व्रत या उपवास से शरीर का शुद्धिकरण होता है, मौन से वाणी शुद्ध होती है और विचलित मन को विश्राम मिलता है। ध्यान व्यक्ति को उसकी भीतर की गहराई में ले जाता है।
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर
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