किशनंगज के एसडीपीअो ने छोड़ी पुलिस सेवा, प्रोफेसर बने, अगले महीने से साइंस काॅलेज में पढ़ाएंगे जंतु विज्ञान

किशनगंज के एसडीपीअो (अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी) डाॅ. अखिलेश कुमार आने वाले दिनों में प्रोफेसर की भूमिका निभाएंगे। साइंस काॅलेज, पटना में जंतु विज्ञान (जूलोजी) पढ़ाएंगे। बीपीएससी (बिहार लोक सेवा आयोग) के जरिए उनका चयन पटना यूनिवर्सिटी में सहायक प्राध्यापक के पद पर हुआ है। अगले माह वे नई नाैकरी ज्वाइन करेंगे। इसको लेकर उन्हें बिहार पुलिस सेवा से विरमित कर दिया गया है। गुरुवार को इस संबंध में गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने अधिसूचना जारी कर दी। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि विरमित होने के बाद बिहार पुलिस सेवा में उनका किसी तरह का कोई दावा विचारणीय नहीं होगा। करीब 6 वर्ष पहले वर्ष 2013 में डाॅ. अखिलेश ने बिहार पुलिस सेवा में बताैर डीएसपी ज्वाइन किया था। बहरहाल बीते दो दशक में यह पहला माैका है, जब किसी डीएसपी रैंक के अफसर ने प्रोफेसर बनने के लिए पुलिस सेवा की नाैकरी छोड़ी है। वर्ष 2013 में आयोजित बीपीएससी की परीक्षा में डाॅ. अखिलेश टाॅप 10 सफल अभ्यर्थियों में शामिल थे। इसके आधार पर उनका चयन बिहार पुलिस सेवा के लिए किया गया था। हाल ही में सहायक प्रोफेसर के पद पर बहाली के लिए बीपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा के परिणाम में उन्हें छठा रैंक मिला है। अररिया के फारबिसगंज के मूल निवासी अखिलेश बचपन में नवोदय विद्यालय पूर्णिया के छात्र थे। इग्नू (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय) से स्नातक करने के बाद पटना स्थित काॅलेज आॅफ कॉमर्स से उन्होंने पीजी व पीएचडी की डिग्री हासिल की थी।

डाॅ. अखिलेश

पुलिस विभाग से कोई गिला-शिकवा नहीं

पुलिस सेवा की नाैकरी छोड़ शिक्षा जगत में आने की कोई खास वजह है क्या? सवाल पर डाॅ. अखिलेश ने कहा कि समाज के लिए शिक्षा उत्तम चीज है। इसमें ज्यादा क्रिएटिव करने का माैका मिलेगा। पुलिस महकमे से कोई गिला-शिकवा नहीं है। पुलिस सेवा को इंज्वाय किए आैर आगे इसे मिस करेंगे।



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Patna News - the sdpo of kishanganj left the police service became a professor will be teaching animal science from next month in science college


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