काेराेना मुसीबत में बदला जीने का तरीका : लुधियाना में फैक्ट्री बंद हुई ताे आलू-प्याज बेचने लगे वहां रह रहे मुजफ्फरपुर के मजदूर
काेराेना मुसीबत में बाहर फंसे बिहार के कुछ मजदूर जीने का तरीका बदल मिसाल पेश कर रहे हैं। लाॅकडाउन काे लेकर लुधियाना के गोविंदगढ़ स्थित फैक्ट्री बंद होने के बाद मशीन ऑपरेटर ने बाइक से आलू-प्याज बेचना शुरू कर दिया। ताे, दिल्ली के कई इलाकाें में मुजफ्फरपुर के रहनेवाले श्रमिक सब्जी बेच रहे हैं। मुजफ्फरपुर जिले की हरपुर पंचायत निवासी नंदकिशोर बताते हैं कि वे 22 वर्षाें से लुधियाना की गोविंदगढ़ स्थित फैक्ट्री में शॉल बनाने की मशीन चलाते हैं। लॉकडाउन में फैक्ट्री बंद होने पर किसी के आगे हाथ फैलाने से बेहतर समझा कि आलू-प्याज बेचकर ही दाे पैसे कमा लिए जाएं। बाइक पर अालू-प्याज लाद कर गोविंदगढ़ से 15 किलोमीटर दूर तक बेचने के लिए जाते हैं। बताया कि उनके 3 साथी समेत एेसे कई श्रमिक इन दिनाें सब्जियां बेच रहे हैं। दिल्ली ख्याला में रह रहे मुजफ्फरपुर के ही संजय सहनी ने बताया कि वे एक स्विच बनाने की फैक्ट्री में हैं। फिलहाल सब्जियां बेचते हैं। उधर, पारू जयमल डुमरी के राजेश ने कहा-वे लोग 25 की संख्या में कोलकाता में एक जगह फंसे हुए हैं।
दरभंगा निवासी किराना व्यवसायी कर रहे कई मजदूराें की मदद
पंजाब के लुधियाना में मजदूरों का सहयोग दरभंगा निवासी किराना व्यवसायी कर रहे हैं। मजदूरों ने दैनिक भास्कर काे बताया कि किराना व्यवसायी लाला इन दिनाें उन्हें बिना पैसे के भी राशन दे रहे हैं। कुछ लाेगाें के साथ मिल कर कई दिनों तक भोजन की भी व्यवस्था की। उधर, राशन दुकानदार ने कहा कि भाेजन की व्यवस्था फिर से शुरू करेंगे।
18 मजदूरों ने मिल कर 40 हजार में भाड़े पर किया है आने को ट्रक
केंद्र सरकार की हरी झंडी के बाद बाहर फंसे बिहार के मजदूरों की घर लौटने की उम्मीद बढ़ी है। पंजाब में सख्ती देखते हुए वहां से लौटने के लिए ये मजदूर अलग-अलग जुगाड़ कर रहे हैं। साहेबगंज के राजेश पंडित व उनके साथी बताते हैं कि 18 लोगाें ने मिल कर 40 हजार रुपए में ट्रक ड्राइवर से बात की है। वह लाॅकडाउन में छूट मिलने पर मुजफ्फरपुर पहुंचा देगा।
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